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16 पिलर का बन रहा बरमान मेला का स्थायी पुल

nspnews [11-03-2018]

निर्माण शुरू, वर्ष 2020 तक हो जावेगा तैयार
करेली। आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका इंतजार वर्षाे से नर्मदा भक्त व दोनो बरमान के वाशिंदे कर रहे थे। नर्मदा तट बरमान खुर्द से बरमान कलां बरमान मेला स्थल के पास से नर्मदा नदी पहुंच मार्ग उच्चस्तरीय पुल का निर्माण रूपये 1099.71 लाख की लागत से शुरू हो गया है। मकर संक्राति पर मेले के उदघाटन पर आये प्रभारी मंत्री ठा. रामपाल सिंह ने इसका भूमिपूजन किया था। 
हो गया आरंभिक ले-आउट
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह पुल 2020 तक तैयार हो जावेगा जिसमे 16 पिलर रहेगे वही इसकी चौड़ाई फोरलाइन की एक पट्टी (टू-लाइन) के बराबर होगी। इसका रेतघाट पर आरंभिक ले आउट हो गया है। निर्माण कंपनी का मशीनरी लाव लश्कर आ चुका है। यह वर्तमान में जहां रेतघाट के लिए सड़क समाप्त हो रही है वही से शुरू होकर नर्मदा तट पार कर सीढ़ी घाट को जोडेगा। 
सतधारा पुल के बाद बड़ी सौगात
इस पुल के लिए लगातार जतन होते रहे समय समय पर आंदोलन के साथ ही विविध मंचों पर सांसद राव उदयप्रताप सिंह, राज्यमंत्री जालमसिंह पटेल, तेन्दूखेड़ा विधायक संजय शर्मा, जिला भाजपाध्यक्ष कैलाश सोनी के अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा पत्रकार जीवेश चौरसिया ने संकल्पबद्ध होकर प्रति दिन 850 पत्र लिखे समस्त क्षेत्रवासियों खबरनवीसों की मांग पर यह बड़ी सौगात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ठीक उसी तरह दी दी है जिस तरह तत्कालीन सांसद हरिविष्णु कामथ की जोरदार पहल पर सतधारा पुल की सौगात 9 जून 1664 को मिली थी जिसका उदघाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. द्वारका प्रसाद मिश्र ने किया था। जिससे नरसिंहपुर जिले का सागर क्षेत्र से सीधा जुड़ाव हा पाया। 
होना है अन्य निर्माण
उल्लेखनीय है मध्यप्रदेश सरकार के खजांची वितमंत्री जयंत मलैया ने बुधवार 1 मार्च 2017 को विधानसभा में बजटीय घोषणा में बरमान खुर्द में नर्मदा नदी पर मेला पुल स्थल पर नर्मदा नदी पर पुल 1099.71 लाख की बड़ी सौगात की घोषणा की थी। वही नर्मदा जयंती 24 जनवरी 2018 पर आये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बरमानकलां में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, रैन बसेरा भवन, रानी कोठी के जीर्णाेद्धार, राजमार्ग 26 से बरमानकलां में नर्मदा तट तक मुख्य पहुंच मार्ग का चौड़ीकरण, आवश्यकतानुसार घाटों के जीर्णाेद्धार एवं सौंदर्यीकरण और कटाव रोकने के लिए राशि देने की घोषणा की। जिस पर जल्द कार्य शुरू हो इस दिशा में जनप्रतिनिधियों से सजगता जरूरी है।
ऐतिहासिक है बरमान मेला
नदियों के किनारे पैदा हुई मेला संस्कृति ने कई परंपराओं व मान्यताओं को हमेशा ही पोषित किया है। नरसिंहपुर जिले का बरमान मेला भी मूल्यों व परंपरा संग सदियों का सफर पूरा कर चुका है। इस मेले की शुरुआत कब हुई इसका कोई ऐतिहासिक दस्तावेज तो उपलब्ध नहीं है लेकिन जनश्रुति के आधार पर यह मेला आठ सदियों के पड़ाव पार कर चुका है। यहाँ आज भी 12वीं सदी की वराह प्रतिमा और रानी दुर्गावती द्वारा ताजमहल की आकृति का बनाया मंदिर मौजूद है। इसके अलावा, यहाँ स्थित 17वीं शताब्दी का राम-जानकी मंदिर, 18वीं शताब्दी का हाथी दरवाजा,छोटा खजुराहो के रूप में ख्यात सोमेश्वर मंदिर, गरुड़ स्तंभ, पांडव कुंड, ब्रह्म कुंड, सतधारा, दीपेश्वर मंदिर, शारदा मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर इतिहास का जीवंत दस्तावेज हैं।

 



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