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दिन में तीन बार रूप बदलती माता हरसिद्धि

nspnews [23-04-2018]

मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील में ग्राम रानगिर में विराजमान माता हरसिद्धि दिन में तीन बार रूप बदल कर भक्तों को दर्शन देती है। शक्ति साधना के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर पहाड़ पर जंगल के बीच स्थित है। यहां चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में प्रतिवर्ष मेला लगता है जिसमें बड़ी संख्या में देश भर से श्रद्धालु यहां पहुंचते है। 
नवरात्रि के दिनों में माता के दर्शन कर आराधना करने का विशेष महत्व होने के कारण परमा से लेकर पूर्णिमा तक भारी भीड़ होती है। त्रिरूप धारिणी हरसिद्धि - अति प्राचीन काल से ऐसी मान्यता है कि माता से जो भी मनौती मांगी जाती है वह पूर्ण होती है और इसी कारण माता को हरसिद्धि माता के रूप में पुकारा जाता है।
सिद्धिदात्री माता दिन में तीन रूप धारण करने को प्रसिद्ध हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार प्रातः काल में माता बाल कन्या के रूप में दर्शन देती हैं। दोपहर बाद माता नयुवती-नवशक्ति का रूप धारण कर लेती हैं। एवं साझ ढलने के बाद वह वृद्ध माता के रूप में भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। यह मंदिर अतिप्राचीन और ऐतिहासिक है।
देहार नदी के पूर्व तट पर घने जंगलों एवं सुरम्य वादियों के बीच स्थित हरसिद्धि माता के दरबार में पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय सागर से दो तरफा मार्ग है। सागर, नरसिंहपुर नेशनल हाइवे पर सुरखी के आगे मार्ग से बायी दिशा में आठ किलोमीटर अंदर तथा दूसरा मार्ग सागर-रहली मार्ग पर पांच मील नामक स्थान से दस कि.मी. दोहिनी दिशा में रानगिर स्थित है। मेले के दिनों में सागर, रहली, गौरझामर, देवरी से कई स्पेशल बसे दिन-रात चलती है। दोनों ओर से आने-जाने के लिए पक्की सड़कें हैं। निजी वाहनों से भी बहुत सारे लोग पहुँचते हैं।