तानाशाही के तांडव का नाम था आपातकाल

nspnews 20-03-2018 Editorial

लोकतंत्र विजय दिवस पर विशेष
वर्तमान नई पीढ़ी की स्मृति पर लोकतंत्र पर आई अमावस्या का शायद ही कोई अंश याद होगा। स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अवसर 25 जून 1975 में एक ऐसा भी अवसर आया जब एक व्यक्ति जिसका चुनाव भ्रष्टाचरण के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रद्ध किये जाने के कारण अपनी सत्ता को बनाये रखने के लिये सारे लोकतांत्रिक अधिकारों को सारी सांवैधानिक मर्यादाओं को समाप्त कर अपनी सत्ता पिपाशा को पूरा करने आपातकाल लगा दिया गया इसमें आपातकाल लगाने के सारे संवैधानिक प्रावधानों को दर किनार करके आपातकाल की घोषणा कर दी गई प्रावधानों के तहत आधे से अधिक प्रांत जब मांग करें नोट भेजे कि कानून व्यवस्था संकट में है तब कैबनिट केन्द्र का सर्वसम्मति से प्रस्ताव करे तब आपातकाल लगता है। इन सबका उलंघन करते हुये बिना कैबनिट के प्रस्ताव के पूरे देश में तानाशाही के तांडव का नाम था आपातकाल । 
कोई अपील नहीं कोई न्यायिक व्यवस्था नहीं न्यायालयों के सारे अधिकार समाप्त लाखों लोगों की निरपराध लोगों की गिरफ्तारी लोकनायक जयप्रकाश नारायण सहित सभी विरोधी दलों के नेता जिसमें अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवानी, जार्ज फर्नाडीज, कांग्रेस के भी कुछ नेता 250 से अधिक पत्रकार जेलो में डाल दिये गये हिंसा का ऐसा तांडव निरपराध नागरिकों के साथ जो देश ने कभी नहीं देखा न्यायपालिका समाप्त कर दी गई सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों को सुपरसीड करके अपने चुनाव को वैद्य करा लिया गया संपूर्ण देश में हाहाकार, जेल के भीतर भी अकेले म.प्र.में 100 से अधिक व्यक्तियों की असमय मृत्यु हुई । इस इतिहास को लोकतंत्र में विस्वास रखने वालों को जानने की जरूरत है नई पीढ़ी को भी इसे जानने की जरूरत है जिससे अनुभव लेकर लोकतंत्र अक्षुण्य रखा जा सके जिससे फिर कभी अभिव्यक्ति की आजादी फिर कभी बाधित न हो देश हित में यह बहुत आवश्यक है। 
म.प्र.के नरसिंहपुर जिले में जब 25 जून की मघ्य रात्रि आपातकाल लगा 26 जून को हम लोग जिले में आंदोलन की तैयारी में दिनभर लगे रहे । मैं म.प्र.छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का सह संयोजक था जिले में कुल पांच महाविद्यालय थे उनका छात्र संघ था उसका भी मैं संयोजक था जयप्रकाश जी की गिरफ्तारी के बाद सभी आंदोलित थे। रात में सारी तैयारियों के बाद रात्रि दूसरे स्थान पर सोये सुबह उठकर जुलूस की तैयारी में थे तभी गिरफ्तारी हुई मेरे साथ मुन्ना पाठक थे तुरंत नरसिंहपुर करेली से लाया गया प्रारंभ में धारा 151 के तहत गिरफ्तारी कर नरसिंहपुर जेल भेज दिया इसके बाद संपूर्ण जिले में बंद और जुलूस निकाला गया 100 लोगों की गिरफ्तारी हुई । जेल में भी भारी अव्यवस्था थी कैदियों के साथ रखा गया जेल में जितनी व्यवस्था उससे तिगुनी तादाद में लोग रखे गये कैदियों को जो खाने दिया जाता था वही हम लोगों को दिया गया। यहां नित्य सुबह उठकर प्रार्थना गीता का 16 वॉं अध्याय फिर जेल की प्रार्थना आपस में विचार गोष्ठियॉ 15,20 दिन बाद चिंता बढ़ने लगी कुछ लोग कहते हमें क्यों पकड़ा क्या अपराध है हमारा, कब छूटेगें, रेग्यूलर कैदी मजे से समय काटते थे उन्हें मालूम था हम कब छूटेंगे पर हम लोगो को नहीं मालूम कब छूटेगे एक कार्यकर्ता जिसकी शादी हुई थी वह बंद हो गया उसका बाद में मानसिक संतुलन ही बिगड़ गया बाद में उसकी असमय मृत्यु हुई। 
दो माह बाद मंडला जिले के कुछ वरिष्ठ जिसमें विधायक विजयदत्त झा, घनश्याम जायसवाल, कस्तूरचंद जैन निवास, वदामीलाल वर्मन, सावलदास आये तब जेल की नरसिंहपुर में व्यवस्थायें सुधरी । उन्होंने सबको जेल मेन्युअल बताया तीन माह बाद जिले के 4 लोग जबलपुर केन्द्रीय जेल ट्रांसफर कर दिये गये पुलिस द्वारा जब हम लोग जबलपुर ले जाये जा रहे थे तब वरिष्ठ पत्रकार सुरेश अग्रवाल जबलपुर स्टेशन पर मिले उन्होंने सारा बाहर का हाल बताया कि लोग किस तरह से भयभीत हैं उन्होंने आंदोलन करके जेल आने की इच्छा व्यक्त की तब मैने जोर देकर कहा अभी आप हो जो बाहर का काम चला रहे हो सबको हिम्मत है भीतर हम लोग फंस गये हैं कोई भविष्य छूटने का दिखाई नहीं देता। 
जबलपुर में हम लोगों को बैरक न. 12 छोटी गोल में रखा गया जहॉं हम लोगों के साथ डॉं दिवाकर सिवनी, देवीसिंह ठाकुर सिवनी, छिंदवाड़ा के भी सुंदर सिंह सकरवार, घनश्याम चिरवलकर, 82 वर्षीय अन्ना जी गार्वे सौंसर, अजय औरंगाबाद छिंदवाड़ा से अन्य जिलों के लोग भी थे। जबलपुर सेन्ट्रल जेल में बड़ी सख्त व्यवस्था सुबह लॉंकअप खुलता 6 बजे बंद हो जाता, यहॉं सिग्रीगेशन वार्ड में ब्रजलाल वर्मा पूर्व संचार मंत्री, पुरषोत्तम कौशिक पूर्व केन्द्रीय मंत्री, संंभाजी राव आंग्रे गोरा बैरेक में, ग्वालियर से यहॉं भी प्रातःकाल प्रार्थना, गीतापाठ, व्यायाम, वहीं छिंदवाड़ा के नारायण राव पोफली, दादा बालमुकुन्द गुप्ता, नाश्ता, भोजन का प्रबंध देखते थे मैने जेल की लायब्रेरी का काम ले रखा था स्वतः पढता लोगों को पढाना, कैदियों को भी पढ़ाना। अनेकों निरक्षर लोगों को लिखना सिखाया, विचार, गोष्ठियॉं, सबसे ज्यादा पैरोल से लौटकर आने की प्रतीक्षा रहती थी उन्हें घेरकर सब बैठ जायें बाहर की खबर लेने इसके अलावा बाहर की खबरो के लिये अन्य माध्यम नहीं थे। जेलोंं की अनेकों घटनायें है बीमारी के कारण कई घटनायें हुई। ज्यादा दिन होने से अंतिम दिनों में भारी चिंता और बैचेनी बढ़ने लगी लोग अनमने रहने लगे इसको ठीक करने सरदार आंगे साहब ने एक अभियान चलाया अनिष्ट समाप्त करने सभी लोग भजन करो, सभी मीसा बंदियों को एक एक माला 64 पेज की कापी दी मंत्र था ‘‘ हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे‘‘ स्वयं आंग्रे जी संख्या लिखते। इमरजेंसी में इतने अफसाने हैं इतनी घटनायें है उन्हें एक बार में रेखांकित नहीं किया जा सकता। 
समय गुजरता रहा गुप्तचर विभाग ने रिपोर्ट दी श्रीमति इंदिरा गॉंधी को कि अभी चुनाव कराये जायें तो पुनः सरकार बन जायेगी अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, अन्य देशों में भी अपने देश के हालातों की जानकारी आने के बाद उनका भी दबाव आया चुनाव की घोषणा हुई जेल के भीतर दो पक्ष हो गये एक चाहता था चुनाव का बहिष्कार करो कैसे चुनाव लडे़गें साधन कहॉं से आयेगा। कहते हैं जब जनता नेतृत्व करती है आशीर्वाद देती है चादर फैलायें चंदे से भर जाये कोई भी भाषण दे रहा पूरी जनता सुनती जब जगजीवन राम जी ने सरकार से इस्तीफा दिया उससे भारी उत्साह पूरे देश में बना। 
देश ने कर दिखाया बिना झंडा, बिना घोषणा पत्र, बिना साधन के पूर्व पश्चिम, उत्तर दक्षिण तानाशाही पराभूत हुई इतिहास में एक प्रधानमंत्री भी चुनाव हारी कहते हैं जनता में जनार्दन बसते हैं ठेठ ग्रामीण क्षेत्रों से तानाशाही  हारी लोकतंत्र जीता । 21 मार्च 1978 नई सरकार द्वारा आपातकाल समाप्त हुआ तब जाकर मैं जबलपुर केन्द्रीय जेल से रिहा हुआ लोकतंत्र हमारे डी.एन.ए में हैं तिलक जी ने जो घोष किया हमारे रक्त में समाहित है ‘‘ स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ^^ Freedom is the song of the soal हमें कोई पराधीन नहीं कर सकता इतिहास साक्षी है कुछ समय देश दब सका है फिर उठ खड़ा हुआ। जय लोकतंत्र जय हिन्दुस्तान । 
                                                                                                                              आलेख : कैलाश सोनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, लोकतंत्र सेनानी संघ 

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